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मनरेगा का नाम बदलकर ये हो सकता है

न्यू दिल्ली : लोकसभा के पटल पर मंगलवार को ग्रामीण भारत की किस्मत बदलने का दावा लेकर केंद्र सरकार ने एक नया नाम, नया ढांचा और नई सोच पेश कर दी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे सदन में पुनर्स्थापित किया।
अब अगर संसद से मंजूरी मिलती है, तो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) इतिहास बन जायेगा और उसकी जगह लेगा वीबी-जी राम जी। लेकिन जैसे ही बिल आया, वैसे ही सियासत की आंधी चल पड़ी। सरकार का कहना है कि अब ग्रामीणों को सिर्फ 100 दिन की मजदूरी तक सीमित नहीं रखा जायेगा, बल्कि गांव के विकास की दिशा तय की जायेगी। नये बिल में चार बड़ी प्राथमिकतायें तय की गई हैं, जल सुरक्षाः जल संरक्षण, सिंचाई, भूजल रिचार्ज, जलाशयों का पुनर्जीवन, वनीकरण। मुख्य ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चरः ग्रामीण सड़कें, स्कूल, सार्वजनिक भवन, स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा, आवास। आजीविका से जुड़े संसाधनः कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, स्किल डेवलपमेंट। आपदा और मौसमी हालात के लिये रोजगारः बाढ़ प्रबंधन, तटबंध, आश्रय स्थल, पुनर्वास, वनाग्नि नियंत्रण। सरकार का दावा है कि गांव अब सिर्फ मजदूरी नहीं, संपत्ति और आजीविका बनायेंगे। सरकार का कहना है कि रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन हो जायेंगे। हर काम को राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा जायेगा। PM गति-शक्ति से लिंक GPS, बायोमेट्रिक, AI डैशबोर्ड से निगरानी होगी। मतलब, काम भी डिजिटल, निगरानी भी डिजिटल और जवाबदेही भी डिजिटल।

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